रविंद्रनाथ टैगोर की रचनाएंःअपरिचिता 2

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2-अपरिचिता कहना व्यर्थ है, विवाह के उपलक्ष्य में कन्या पक्ष को ही कलकत्ता आना पड़ा। कन्या के पिता शंभूनाथ बाबू हरीश पर कितना विश्वास करते थे, इसका प्रमाण यह था कि ...

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